MUCORMYCOSIS DISEASE क्या है?
यह दुर्लभ फंगल संक्रमण है, जो फफूंद के संक्रमण से होता है । यह पर्यावरण से ही हमारे अंदर प्रवेश कर संक्रमित करता है । दरअसल mucormycosis को ही जाइगोमाइकोसिस या फाइकोमाइकोसिस के नाम से जाना जाता है |
यह कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति को होने की ज्यादा संभावना होती है । कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली में जैसे एचआईवी /ऐड्स , डायबिटीज या अन्य ऐसा व्यक्ति जिसका कभी अंग प्रत्यारोपण हुआ हो या जो लंबे समय तक स्टेरॉइड( यह एक प्रकार का मेडिसिन है जिसका उपयोग ज्यादातर जॉइंट पेन, अर्थराइटिस , साइटिका इत्यादि बीमारी में किया जाता है) का यूज़ किया हो|
प्रकार
साइनस और मस्तिष्क तथा गुर्दा प्रत्यारोपण वाले को ज्यादा प्रभावित करता है|
फेफड़ों से संक्रमित व्यक्ति को ज्यादा खतरा|
Gastro instetile भी एक प्रकार है जो वयस्कों के अपेक्षा शिशु में ज्यादा होता है जिसका वजन कम हो या समय से पहले जिस बच्चे का जन्म हुआ हो |
संकेत
नस में कवक के संक्रमण से रक्त का थक्का जमुना शुरू हो जाता है जिसके कारण रक्त के बाहाव में कमी आ जाती है जिससे आसपास के सेल मरने लगते हैं जिसके कारण निम्न प्रकार के संकेत उभरते हैं-
चेहरे में दर्द |
बुखार |
आंख में सूजन के साथ तेज साइनस |
मतली के साथ उल्टी या खूनी उल्टी |
पेट दर्द |
सीने में दर्द |
नाक से काला पदार्थ या म्यूकस के साथ काला-काला कुछ आना|
प्रभावित अंग
यह रोग सबसे ज्यादा मस्तिष्क को प्रभावित करता है इसके साथ साथ त्वचा, हृदय और प्लीहा को भी प्रभावित करता है |
बचाव
आंधी-तूफान, हरिकेन, टॉरनेडो जैसे डिजास्टर में बाहर घूमने से परहेज करें |ऐसे समय में फंगस हमारे सास के द्वारा अंदर पहुंचकर संक्रमित कर सकता है |
इलाज
ध्यान रखें इस बीमारी की अभी कोई वैक्सीन नहीं आई है |
अभी तक इस बीमारी पर रिसर्च जारी है ,फिर भी इस के ट्रीटमेंट के लिए Amphotericin B (जो एक प्रकार का फंगल इन्फेक्शन और कालाजार जैसे बीमारी में उपयोग होने वाला एक मेडिसिन है |) या सर्जरी के द्वारा इलाज किया जाता है |
इस बीमारी को पहचानने के लिए सीटी स्कैन या एम आर आई के मदद से डायग्नोसिस किया जाता है | ब्लड टेस्ट कारगर साबित अभी तक नहीं हुआ है |
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